पेड़ !
राजमार्ग से सटे
इस चिनार के जंगल में
यद्यपि तुम सबसे लंबे हो,
पर अब मैं,
सीधे देख सकता हूं तुम्हारी नाभि
क्योंकि इस ऊंचाई तक आ गई है सड़क।
पेड़!
हाथी खुरच- खुरच कर
और पतला कर सकते हैं
तुमको - अंधेरे में,
बन रहे फ्लाईओवर की धूल
तुमको गंदा अघोरी साधु बना सकती है,
और तुम्हारे बगल में, लगने जा रहा
मोबाइल टावर ,तुम्हें घोंसला विहीन कर सकता है।
पेड़!
अगली मुलाकात तक
तुमको ढक सकती हैं
जंगली बेलें ,
जंगल में लगाई गई आग में
तुम भस्म हो सकते हो
कोई तस्कर सरेआम
तुमको जमींदोज भी कर सकता है।
पेड़ !
सावधान रहना
राजमार्ग से सटा जंगल
अब सबकी निगाह में है।
फ्लाईओवर, मोबाइल टावर, सिगरेट, आरियां,
सब दिन दहाड़े घात लगाए बैठे हैं...
कमल किशोर पाण्डेय


No comments:
Post a Comment