शाखाें को काटा नहीं
तुम्हारी उम्मीद में
आ जाओ
मेरे आंगन के सामने
तनकर खड़े
चीड़ के पेड़ पर
लेटो, बैठो
कूहको.
मैंने बचाकर रखे हैं
मक्के के दाने
देखो, आओ
चखो.
इसकी तीखी पत्तियों से
गुदगुदाओ,
अपने - पैर के तलवे
इसके लकड़ीनुमा
फल से ढूंढ लो सारे दाने
इसमें झूलो, इससे बोलो
इसको जी लो.

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