Friday, April 10, 2026

आग्रह



 शाखाें को काटा नहीं

तुम्हारी उम्मीद में

आ जाओ

मेरे आंगन के सामने

तनकर खड़े

चीड़ के पेड़ पर

लेटो, बैठो

कूहको.

मैंने बचाकर रखे हैं

मक्के के दाने

देखो, आओ

चखो.

इसकी तीखी पत्तियों से

गुदगुदाओ,

अपने - पैर के तलवे

इसके लकड़ीनुमा

फल से ढूंढ लो सारे दाने

इसमें झूलो, इससे बोलो

इसको जी लो.

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