भूस्खलन से-
अक्सर दरक जाती,
पहाड़ी के एक ओर मेरा गांव है ,
और दूसरी ओर राजधानी।
इन दोनों -
विजातीय दुनियाओं को ,
जोड़ती है एक बीमार सड़क,
जिसे बहुधा तोड़ देता है विधाता ।
डंगरियों से -
पुछवाई नाराजगी की वजह,
तो पता चला -
पहाड़ नाराज है
उन लोगों से ,
जो केवल घूमने निकले थे
राजधानी की ओर,
और रह गए
वहीं के होकर ।
उन लोगों से ,
जो अब आ पाते हैं,
साल में एक बार गांव,
दिया जलाने
पितरों के नाम का ।
उन लोगों से ,
जो हवाई जहाजों में,
बिना पीठ दर्द के
लांघ जाते हैं
गढ्ढों वाली सड़कें।
इसलिए विधाता,
गढ़ देता है
खराब मौसम को,
और गिरा देता है,
गुस्से में पहाड़ियां
जो जिस पार हो,
उस पार ही बने रहो
जैसे हो
वैसे रहो

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